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बारकोड: Code 128, EAN-13 से कैसे अलग है

भारत में बिकने वाले किसी भी प्रोडक्ट का EAN-13 बारकोड बेतरतीब अंकों से शुरू नहीं होता — GS1 सिस्टम में 890 प्रीफ़िक्स भारत के लिए रिज़र्व है, और यह सिर्फ़ यह बताता है कि बारकोड किस देश की कंपनी ने रजिस्टर करवाया, न कि प्रोडक्ट असल में कहाँ बना।

890 प्रीफ़िक्स और GS1 India

GS1 India (पहले EAN India), जिसकी स्थापना 2005 में हुई, भारत के लिए 890 प्रीफ़िक्स एलोकेट करती है। इसका मतलब सिर्फ़ इतना है कि बारकोड किसी भारत-रजिस्टर्ड कंपनी का है — मैन्युफ़ैक्चरिंग लोकेशन से इसका सीधा कोई रिश्ता नहीं। किसी विदेशी ब्रांड का "मेड इन इंडिया" प्रोडक्ट उस ब्रांड के होम-कंट्री प्रीफ़िक्स के साथ भी बिक सकता है, और भारतीय कंपनी का विदेश में बना प्रोडक्ट 890 प्रीफ़िक्स के साथ।

Code 128: जब लेटर्स और सिंबल्स चाहिए हों

EAN-13 के उलट, Code 128 सिर्फ़ अंक नहीं, पूरे ASCII सेट के लेटर्स और स्पेशल कैरेक्टर्स भी एन्कोड कर सकता है। यह फ़ॉर्मैट लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउस में इस्तेमाल होता है, जहाँ सीरियल नंबर या ज़्यादा कॉम्प्लेक्स आइडेंटिफ़ायर एन्कोड करने होते हैं।

फ़ॉर्मैट को मनमाने ढंग से क्यों नहीं बदल सकते

हर बारकोड फ़ॉर्मैट के अपने स्टार्ट/स्टॉप सिंबल की संरचना, बार की चौड़ाई और चेकसम एल्गोरिदम होते हैं। स्कैनर इन स्ट्रक्चरल मार्कर्स से फ़ॉर्मैट अपने-आप पहचान लेता है, इसलिए EAN-13 में मनमाना टेक्स्ट सीधे एन्कोड नहीं हो सकता — यह सिर्फ़ 12 अंक और चेक डिजिट स्वीकार करता है।

यह क्यों ज़रूरी है

  • किसी प्रोडक्ट या इन्वेंटरी आइटम को लेबल करने के लिए ज़रूरी फ़ॉर्मैट में बारकोड जनरेट करना।
  • डेटा टाइप के हिसाब से कौन-सा फ़ॉर्मैट चुनें — सिर्फ़ अंक या मनमाना टेक्स्ट — यह समझना।
  • लेबल प्रिंट करने से पहले चेक डिजिट सही है या नहीं, यह वेरिफ़ाई करना।

UPC-A और EAN-13 से इसका फ़र्क़

UPC-A एक 12-अंकों का फ़ॉर्मैट है जो अमेरिका और कनाडा में इस्तेमाल होता आया है और यूरोपियन EAN-13 से पहले का है। असल में UPC-A, EAN-13 का ही सबसेट है: 12-अंकों के UPC-A नंबर के शुरू में एक ज़ीरो जोड़ने पर वही वैल्यू वाला पूरी तरह वैलिड 13-अंकों का EAN-13 कोड बन जाता है, इसलिए भारत में इंपोर्टेड अमेरिकी प्रोडक्ट भी बिना किसी एक्स्ट्रा सेटअप के किसी भी बिलिंग स्कैनर पर स्कैन हो जाता है।

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